कुल मिलाकर साइलेंट कॉमेडी के नाम पर बनी ‘उफ्फ ये सियापा’ अधिकांश मौकों पर हंसाने से चूक जाती है। क्योंकि यहां हंसाने से ज्यादा कहानी को फंसाने पर जोर दिया गया है, जिस वजह से फिल्म दोनों जगह से मात खा जाती है। क्या हैं कमियां ‘उफ्फ ये सियापा’ की सबसे बड़ी कमी इसकी लंबी अवधि है। साइलेंट कॉमेडी फिल्म को 1 घंटा 20 मिनट या अधिकांश डेढ़ घंटा का होना चाहिए। लेकिन सोहम शाह की ये फिल्म लगभग दो घंटे (116 मिनट) की है। जिससे कई मौकों पर ऐसा लगता है कि फिल्म को खामखा खींचा जा रहा है। एक ही कहानी को बार-बार दोहराया गया है, जिससे दर्शक ऊबने लगते हैं। एक ही जैसे सीन का बार-बार दोहराव फिल्म को उबाऊ बनाता है।